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भावनात्मक सुनना क्या है?

भावनात्मक सुनना यानी किसी व्यक्ति की बात को ध्यान, धैर्य और सम्मान के साथ सुनना। इसका उद्देश्य तुरंत सलाह देना या समस्या को ठीक करना नहीं, बल्कि सामने वाले को अपनी बात कहने की जगह देना है।

इस बातचीत में क्या होता है

आप अपने मन की बात अपनी गति से साझा कर सकते हैं। आपको हर बात का जवाब देना जरूरी नहीं है और आप किसी भी समय रुक सकते हैं।

यह क्या नहीं है

यह थेरेपी, काउंसलिंग, मेडिकल या आपातकालीन सहायता नहीं है। अगर आपको इलाज या तुरंत मदद की जरूरत है, तो किसी योग्य पेशेवर या स्थानीय आपातकालीन सेवा से संपर्क करें।

किसके लिए उपयोगी हो सकता है

जब मन में बहुत कुछ चल रहा हो, जब आपको लगे कि कोई सुन नहीं रहा, या जब आप किसी भरोसेमंद व्यक्ति से शांत बातचीत करना चाहते हों।

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